पर शायद मैं हार गया
मैंने सोचा खूब पढ़ूँगा,
मेहनत करके अव्वल आऊँगा,
एक सफल व्यक्ति बनूँगा,
पर शायद मैं हार गया।
खूब लगन से काम करूँगा,
मेहनत करके ऊँचे पद बैठूँगा,
जीवन खुशी से भरा होगा,
पर शायद मैं हार गया।
सोचा था एक घर बनाऊँगा,
हर कोना मेरी मेहनत गायेगा,
छ्त पर कई सपने सजे होंगे,
पर शायद मैं हार गया।
रिश्ते भी कई पैदा हुए,
कुछ को बचाने की कोशिश करी,
अपनी कम, लोगों की ज्यादा सुनी,
पर शायद मैं हार गया।
फिर सोचा खुद के लिए जियूंगा,
पूरी दुनिया घूम के आऊँगा,
जो मन होगा वही खाऊँगा, पहनूँगा,
पर शायद मैं हार गया।
वजह क्या रही समझ नहीं आया,
क्या सही, क्या गलत समझ नहीं पाया,
कितना भी हँस लूँ, उम्मीद बना लूँ,
पर शायद मैं हार गया।
धन्यावाद,
Ayush P Gupta
03 Aug 2026
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