श्रद्धा अनुसार

गंगा स्नान का हिन्दू धर्म में बड़ा मह्त्व है। कहा जाता है, इंसान अगर गंगा में डुबकी लगा लेता है तो उसके सारे पाप धुल जाते हैं। पाप है क्या इसका अर्थ समझना कठिन है। जिसे भी आप पाप समझते हो, वो धूल जाएगा।लेकिन इंसान फिर से अपना पाप का घड़ा भर लेता है। कुछ ज्ञानी लोगों का कहना है गंगा सिर्फ शरीर का पाप धोती है, मन का पाप नहीं। वैसे गंगा जी ने कभी कुछ स्पष्ट नहीं करा।
हरिद्वार स्टेशन पहुचते ही मैं हर की पौड़ी की ओर चला। यही से आपका देव नगरी के पहले छल से सामना होगा। क्यूँकी मैं कई बार आ चुका था, तो मुझे जाने का सस्ता तरीका पता है। बाहर कुछ दूर चलिए और मात्र बीस रुपये में हर की पौड़ी पहुंच जायेंगे। पर इस बार ऑटो वाले ने मुझे आधे रास्ते ही उतार दिया। कोई वीआईपी आरहा था, तो रास्ता बंद था। घाट अभी 1km था। मेरे साथ वाले ने बोला यह भोले नाथ की परीक्षा है, हमें पेदल ही जाना पड़ेगा। हर हर महादेव करके हम चल दिये। तभी वीआईपी की गाड़ी निकलती दिखाई दी। वीआईपी को परीक्षा देने की जरूरत नहीं पड़ती।
खैर थोड़ी देर चलने के बाद, हर की पौड़ी वाला घंटाघर दिखाई पड़ गया। पुल पर आते ही गंगा जी के दर्शन हुए। गंगा आज भी वैसे ही बह रहीं थीं। हाँ मान्सून में थोड़ी मिट्टी ज्यादा आती इसलिए साफ़ पानी नहीं दिखेगा। पर उसके वेग में कोई कमी नहीं।
पुल पर कई रेडी वाले बैठते हैं। मछली को खिलाने की आटे की गोली, टैटू वाले, नकली रूद्राक्ष वाले, फोटो वाले, कुछ शिलाजीत, हींग वाले, कुछ कस्तूरी बेचते हैं। पहली बार सब खरीद लेते हैं, फिर अगली बार इनका खेल समझ आ जाता है। मैंने टैटू वाले से महादेव का स्टाम्प, अपनी दाहिने हाथ पर लगवा लिया। जरा लगे तो हम हरिद्वार होके आए हैं।
पुल से उतरते ही आपको काफी भीड़ दिखेगी। सब श्रद्धालु गंगा स्नान में लगे हैं। जिसको जहाँ जगह मिली, नहा ले रहे। कुछ दूर चलके जब मैंने वापस जब उस पुल के खंबे देखे, तो दिल सहम गया। गंगा अपने पूरे प्रयत्न से उसपर चौबीसों घंटे प्रहार कर रही। वो दृश्य काफी डरावना है। पुल ने भी थान रखी है ना हिलने की। आगे चलें तो आपको भंडार खिलाने वाले दुकानदार मिलेंगे। ये आपको पूछेंगे की गरीबों को खाना खिलाना है क्या। इन्हें आपके पापों का प्रायश्चित कराने की काफी जल्दी है। कुछ लोग श्रद्धा अनुसार तीस, पचास, सौ गरीबों को भोजन करा देते हैं।
आगे बड़ने पे आपको काफी दुकान दिखेंगी। घंटी, शंख, बैत, पूजा सामाग्री इत्यादि सब मिल रहे। ये सब अगर आपको लेना हो, तो रुक जाइए थोड़ा। अन्दर गलियों में और भी अच्छा सामान मिलेगा। पहले गंगा स्नान करिए। हमारे पिताजी ने बताया स्नान ब्रह्म कुंड में करना शुभ होता। अतः अब मैं हर की पौड़ी के द्वार पर आ गया। सबसे पहले आप अपने जुते चप्पल जमा करें। निशुल्क होता है, बस अगर आपकी कोई श्रद्धा हो तो, कुछ दे दो। श्रद्धा के नाम पर बहुत कुछ होता है हमारे देश में।
हर की पौड़ी घाट काफी साफ़ दिखेगा। यहाँ मार्बल बिछा है और लाल पत्थर से सीढ़ी बनाई है। यहाँ घंटा घर के साथ साथ कुछ छोटे छोटे प्राचीन मंदिर भी हैं। यहीं पर प्रसिद्ध गंगा आरती भी होती है। इधर काफी पंडित दिखेंगे। सबके बैठने का स्थान निश्चित है। ये आपकी पूजा संपन करायेंगे और दोने में दीपक प्रवाह करवाएंगे। अब तक सब ठीक रहेगा। बस कुछ लोगों की बात श्रद्धा अनुसार दक्षिणा पर खराब हो जाती है। खैर मुझे गंगा स्नान से ज्यादा मतलब है। एक खाली जगह देखकर मैंने भी बैग जमा लिया।
गंगा जी का पानी ऐसा लगता है मानो बर्फ पिघल कर आयी हो। बारहों महीने ठंडा रहता है। जब तक आप पहली डुबकी ना लगा लें तब तक आपको पानी ठंडा ही लगता रहेगा। पता नहीं एक डुबकी में ऐसा क्या जादू होता है कि ठंड लगना गायब। मैंने भी श्रद्धा अनुसार अपनी डुबकी लगाई। हर एक पाप याद किया और प्रार्थना की मेरे पापों के साथ साथ मन का मैल भी धुल जाए। हर बार की तरह एक दो लोगों की गंगा जली भी भर दी।
गंगा स्नान करके मैं थोड़ी देर घाट पर ही बैठ गया। गंगा के किनारे बैठ के आपको काफी शान्ति मिलती है। चाहे हरिद्वार हो या बनारस। मुझे हरिद्वार में ज्यादा शांति मिलती है। एक बुजुर्ग औरत शायद अपने पोते को स्नान करवा रही थी। बच्चा काफी छोटा था। गोदी का था। काफी जोर जोर से रो रहा था। मैं मन ही मन उससे पूछ रहा था कि भाई क्या हुआ? क्यूँ रो रहा? भाग्यशाली है इतनी कम उम्र में उसे गंगा जी के दर्शन हुए। आज भले ही रो रहा हो, कल यही पे बैठ के उसे अच्छा लगेगा।
घाट पर बैठे बैठे मैं विचार करने लगा। आखिर पाप है क्या? क्या सच में पाप धुलते हैं? हाँ स्नान करके आप खुद में एक नयी ऊर्जा मेहसूस करेंगे। कहा जाता है, गंगा स्नान भी तबही हो पाता है जब खुद गंगा जी आपको बुलायें। शायद इंसान के पापों का घड़ा भरना गंगा मैइया को पहले ही पता लग जाता है। मेरे घर में अभी सिर्फ मेरा ही घड़ा भरा था, इसलिए शायद मेरा ही अकेला आना हुआ।
कुछ लोग गंगा स्नान को काफी आनंद से करते। कुछ फोटो ले रहे थे। काफी खुश लग रहे थे। पूरा पूरा परिवार स्नान करने आया था। दूसरी तरफ लोग दुःखी थे। सर पर बाल नहीं थे, और धोती कुर्ता पहने थे। जिंदगी के दो पहलू, सुख और दुःख का दृश्य मेरे अगल बगल स्पष्ट था। मैंने सोचा अभी तो सीधे ही देखता हूँ।
घाट से आगे चले तो एक औरत कोई पाठ कर रही थी। थोड़ी चिंतित थी, और काफी जल्दी जल्दी पाठ पढ़ रही थी। मगर अनोखा दृश्य ये नहीं था। उसके बाजू में उसका पति बैठा था। वह उसपर लगातार हवा कर रहा था, एक बड़े पत्ते से। गर्मी तो काफी थी ही। उस दृश्य को देखकर मैं थम सा गया। समझ नहीं आया वो औरत, अपनी भक्ति से, ऐसा और क्या ही माँग रही होगी? इंसान को जो मिला है उसकी हमेशा कम ही कदर करता आया है। या शायद देख ही नहीं पाता उसे क्या मिला है।
वापस चले तो मैंने भी श्रद्धा अनुसर कुछ जुते वाले को दे दिया। आख़िर मुफ्त में आजकल कुछ नहीं होता है। बिल्कुल अभी पाप का घड़ा खाली हुआ है, अब ही से कैसे भर दूँ। आगे चलकर मैंने पूरी खाने का सोचा, फिर एक ठंडी लस्सी का भी। स्नान करके भूक काफी लगती है। सोचा, थोड़ा और घुमा जाए।
मार्केट में काफी चीज मिलती हैं। मैं यहाँ से पहले शंख, बाँसुरी, बैग, शाल ले जा चुका हूँ। गलियाँ के अंदर भी काफी गलियाँ हैं। इनमे फुर्सत से घुमें कभी, काफी आंनद आता है। गीता प्रेस की भी काफी दुकाने हैं। काफी किताबें मिलती हैं। आप बस चलते जायें, काफी सारी चीजें मिलेंगी। हरिद्वार की असली शान यही दुकाने हैं, और यही गलियाँ यहाँ का इतिहास भी हैं।
शाम का वक्त़ हो चला, गंगा आरती देखने के लिए लोग हर की पौड़ी की सीढ़ियों पर बैठना शुरू कर दिए। काफी भव्य आरती होती है। मैंने अपना स्थान पुल पर जमा लिया। वहां से काफी साफ़ आरती दिखाई देती है। जैसे जैसे आरती शुरू होती वैसे वैसे पूरे वातावरण में भक्ति घुलने लगती है। जैसे कि एक दिव्य शक्ति जो सबको एक साथ मंत्र मुग्ध कर रही हो। इस समय गंगा स्नान रोक दिया जाता है।
आरती खत्म होते ही लोगों ने फिर से स्नान करना शुरू कर दिया। यहाँ पर हर समय, चाहे रात हो या दिन, हमेशा हजारों लोग स्नान करते रहेंगे। यहाँ स्नान कभी नहीं रुकता। अभी तो सावन आना बाकी है। तब शायद स्नान की भी जगह ना मिले।
मैं एक बार फिर से घाट पर जाके बैठ गया। वही दृश्य था। गंगा पुल पर अपना पूरा जोर लगा रही थी। वही कुछ लोग खुश थे, और कुछ लोग दुःखी। गंगा ने ना जाने कितने लोगों के पाप धोए होंगे। फिर भी वो मैली नहीं हुई। आज भी वो वैसे ही बहती आ रही है, जैसे कई हजारों साल पहले से। उसने इंसान के कई शारीरिक पाप धो दिए। उसे उम्मीद होगी कि उसकी प्रेरणा से इंसान अपने मन के पाप भी धो ही लेगा।
धन्यवाद,
Ayush P Gupta
18 July 2026