मैंने मरने के बाद देखा!
मैंने मरने के बाद देखा,
नीचे निर्जीव सा मैं पड़ा हूँ,
सामने निराकार भी मैं खड़ा हूँ।
मेरे कुछ अपने शोक मना रहे,
कुछ पराये मेरी बड़ाई कर रहे।
बुजुर्ग खामोश, उदासीन होकर बैठे,
बच्चे जैसे बेफिक्र होकर दौड़ रहे।
कुछ को आधी कप चाय की जल्दी थी,
कुछ को जल्दी घर भागने की।
कुछ लोग मन ही मन खुश थे,
मैंने देखा कौन अपने कौन पराये थे।
मेरे चलने का अब वक्त़ हो गया,
खुद को कंधों पर उठते देखा।
बारी बारी लोग अंतिम दर्शन कर रहे थे,
मुझसे जलने वाले भी मुझे कंधा दे रहे थे।
घर से अब दूर लिए जा रहा था,
पर मेरा सामान पीछे छुटा जा रहा था।
जिंदगी भर दूसरों से बैर पालता रहा,
पर जला तो मुझे अपनों ने ही दिया।
लौटकर देखा मेरा सामान हटा दिया था,
पर ना जाने क्यों मेरा पैसा नहीं हटाया गया।
जिंदगी भर जो भी कुछ मैंने जोड़ा था,
अफसोस, एक कोड़ी भी साथ न ले जा पाया।
धन्यवाद,
Ayush P Gupta
19 Aug 2026