चलो जल्दी चाँद पर चलें

शाम होने को है,
दिये जलने को हैं,
अंधेरा छाने लगा है,
चाँद अब उगने को है,
चलो जल्दी चाँद पर चलें।
रास्ता लंबा होगा,
ठिठुरती ठंड भी होगी,
ना राहगीर होगा, ना अजनबी,
मीलों तक अंधेरा होगा,
चलो जल्दी चाँद पर चलें।
पर जाना कैसे होगा,
ना कोई ट्रेन जाती होगी,
ना कोई हवाई जहाज जाएगा,
शायद उड़न खटोला चुराना पड़ेगा,
चलो जल्दी चाँद पर चलें।
कुछ भेट तो लेके जाना होगा,
पुए, खीर, बताशे ले जाना होगा,
दो प्याली, एक थाली रखना पड़ेगा,
वरना हमारा मुन्ना रूठ जायेगा,
चलो जल्दी चाँद पर चलें।
रात अब बढ़ने लगी है,
हवा और ठंडी होती जा रही है,
चंदा मामा खुशी से फुले जा रहे,
अब फटाफट सामान बाँधो,
चलो जल्दी चाँद पर चलें।
बैठ कर उड़न खटोले पर,
हम सब चंदा के घर चलें,
सूरज के उगने से पहले,
एक पोटली खुशी घर बाँध लायें,
चलो अब जल्दी चाँद पर चलें।
धन्यावाद,
Ayush P Gupta
05 Aug 2026