हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं
मेरे दोस्त कुछ बोलते नहीं,
सुनते हैं, पर सुनाते नहीं,
कभी नयी शाखा, कभी नयी पत्ती,
कभी खुशी में एक फूल खिला देते,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
घर से निकलते ही दौड़े आते,
आकर मेरे पैरों से गले लगते,
जोर जोर से पूँछ हिलाते,
और प्यार में रोने भी लगते,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
कुछ दोस्त ज्ञान का भंडार हैं,
बोलते नहीं, ना ही सुनते हैं,
सिर्फ उन्हें पढ़ा जा सकता है,
मेरे चरित्र का गौरव उनकी देन है,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
एक मेरा घुमक्कड़ी दोस्त है,
जब कहो तब साथ चलने तैय्यार है,
उसे पेट्रोल पीना काफी पसंद है,
फिर तो क्या पहाड़ क्या नदी,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
कुछ दोस्त दीवार पर सजे हैं,
कुछ पेन से, कुछ पेंसिल से ,
कहते कुछ नहीं, ना बोलते हैं,
जितना देखो, उतनी खुशी होती है,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
जरूरी नहीं दोस्त सिर्फ इंसान हो,
कुछ बेजुबान भी दोस्त बन जाते हैं,
भले ही उन्हें दोस्ती दिखाना नहीं आता,
पर उनके होने से मेरा जीवन सुन्दर है,
हाँ, मेरे दोस्त कुछ अलग हैं।
धन्यावाद,
Ayush P Gupta
02 Aug 2026