एक अधूरी सूची

बहुत कुछ कहना था, बहुत कुछ सुनना भी था,
थोड़ा जताना भी था, थोड़ा सा सहना भी था,
थोड़ा सा हँसना भी था, थोड़ा सा रोना भी था,
कुछ याद भी करना था, कुछ भुलाना भी था,
फरियाद भी करनी थी, थोड़ी शिकायत भी करनी थी,
थोड़ा साथ घूमना था, थोड़ा खामोश भी बैठना था,
थोड़ा घमंड भी करना था, थोड़ा पश्चाताप भी करना था,
कुछ शायरी भी लिखनी थी, कुछ ग़ज़ल भी कहनी थी,
वादे भी करने थे, थोड़ी कसमें भी खानी थी,
कुछ सपने देखने थे, कुछ हकीकत भी करने थे,
थोड़े पहाड़ लाँघने थे, कुछ नदियाँ भी पार करनी थी,
कुछ पाना भी था, और शायद कुछ खोना भी था,
ज़माने से लड़ना था, थोड़ा कामयाब भी होना था,
काफी गहरी नींद में थे हम जनाब,
थोड़ा सा खुद को जगाना भी था।
धन्यवाद,
Ayush P Gupta
07 July 2026