मेरी प्यारी Rx100

नब्बे के दशक में सम्पूर्ण भारत में एक ही मोटरसाइकिल ने अपना पैर जमा रखा था, यामाहा Rx100. जिसे देखो वो इसका दीवाना था। दमदार इंजन, और हल्का वजन होने से यह गाड़ी एक अलग ही ताकत से भरी मेहसूस होती थी। शायद ही कोई गाड़ी ने भारत के इतिहास में इतना लंबा समय अपना झंडा गाड़े रखा होगा।
उस समय देश में बुलेट, yezdi जैसी भारी गाड़ी दौड़ती थी, जो कि बलशाली लोगों को जंचती थी, पर उनमें वो तेजी या कलाबाजी मुमकिन नहीं थी। भारत के कुछ नवयुवक हताश रह जाते थे। वैसे युवक जो अमिताभ बच्चन जैसे नहीं थे। उस समय सेल्फ स्टार्ट नहीं जन्मा था। बुलेट स्टार्ट करना पैर तुड़वाना माना जाता था। ये भारी गाड़ी काफी पॉपुलर थीं, पर शायद देश को एक नये दोर की गाड़ियों की जरूरत थी। ऐसी गाड़ी जो हल्की हो, ताकतवर हो, माइलेज ज्यादा देती हो, और आम आदमी भी बिना हिचक के चला सके।
यामाहा ने शायद इन्हीं कमी को पकड़ा और Rx100 लॉन्च कर दी। हल्का वजन, जानदार इंजन, जो कि रॉकेट के भाँति भागता था। फिर क्या था हर पिक्चर में हर हीरो बस Rx100 ही दौड़ाता था। दुनिया इसकी चेतक जैसी चाल से दीवानी हो गई।
मेरे घर मुझसे पहले Rx100 आ गयी। शायद 2 साल पहले। पर मुझे होश करीब 2006 में आया। तब हम इसे बेचने जा रहे थे। पर लेने वाले को शायद इसकी वकत नहीं थी। या शायद मेरी किस्मत ज्यादा जोर मार रही थी। फिर क्या था, मेरी बाइक में, हर लड़के की तरह, रुचि आनी शुरू हो गयी। चलानी आती तो थी नहीं, पर हाँ स्टार्ट करनी आती थी। बचपन में बाइक में रेस देकर ही हम खुश हो जाते थे। कुछ महीने ये सिलसिला चला। फिर मैंने थोड़ा चलाना सीख लिया।
उम्र कम थी तो बाहर जाना मना था, पर बाइक के प्रति लगाव नहीं रुका। कभी धोता कभी पोलिश करता। कभी बल्ब बदलता कभी हल्का फुल्का पैंट। मुझे आज भी याद है मैंने पैंट ब्रश से चैन कवर पैंट करा था। आज भी ब्रश के निशान साफ़ दिखाई देते हैं।
दसवीं के बाद मेरी रूचि इसका इंजन खोलने की हुई। शायद इंजन में कोई दिक्कत नहीं थी, जितनी मेरी उत्सुकता में थी। उस समय लालबाग (लखनऊ का बाइक मार्केट) जाना सरल नहीं था। फिर एक दिन पिताजी के साथ जरूरत के पाने, औजार ले आए, जिससे इंजन खोला जा सकता था। पहले तो काफी डर लगा, आखिर पहली बार ऐसा कुछ करेंगे। क्या पता वापस ना बना पाये, क्या पता स्टार्ट ना हो, ऐसे तमाम सवाल मन में उठे, पर बात इज्जत की थी इसलिए मुड़कर नहीं देखा। इज्जत तो क्या ये बस माता, पिता का हमपे विश्वास था, जिसने हमें आगे बढ़ाया।
काफी दिन लगे, पर ऑपरेशन सफल रहा। काफी खुशी थी, आखिर जिसको आप हर दिन चलाते हो, उसी पर ऑपरेशन करना अलग ही खुशी देता है। काफी मज़ा आया और काफी कुछ सीखा भी।
मेरी Rx100 सच में कमाल है। वह मेरे लिए बाइक से जादा एक साथी है। पथ का साथी। मेरे आस पड़ोसी भी शायद ये बात अब समझ गए होंगे। आखिर प्यार छुपाये कहाँ छुपता है। खैर थोड़ा सा और गुणगान करते हैं।
Rx100 का सबसे बड़ी पहचान उसकी ध्वनि है। एक ऐसी मधुर, लय ताल में बंधी आवाज जो कि कम RPM पे कोयल मालूम होती और तेज गति में शेर की दहाड़। जिस तरह से दूर से शेर की मौजूदगी पता लग जाती है, ठीक उसी तरह दूर से ही पता लग जाता है Rx100 आ रही है। और आजकल तो और जादा पता लगता क्यूँकी शेर काफी कम होगए हैं, या ये कहे आजकल के शेरों की आवाज दब सी गयी है। इतने शांत कि पता ही नहीं चलता कब आए कब गए।
सरकार ने प्रदुषण के नियम की वजह से इसका उत्पादन बंद कर दिया। प्रदूषण? हमारी नजर में तो वो खुश्बू है। कभी 2 स्ट्रोक की खुश्बू लीजिए जनाब, आप भी शायद हमारी तरफदारी करेंगे। सुना है, काफी अपराध भी बड़ गए थे, अपने ज़माने की तेज स्फूर्ति से भरी बाइक अक्सर चोरों की क्राइम पार्टनर होने लगी। कई बार काफी इंजीनियरों ने इसका इंजन भी खोल कर देखा है, कि कैसे 100 cc की बाइक में इतना पावर आता।
मैंने काफी तरह की बाइक चलाई है, पर जो 2 स्ट्रोक का मज़ा है, वो शायद किसी और में नहीं मिला। आज भी लोग मुड़कर देखते हैं। कुछ तो रास्ते में आश्चर्य करते हैं, तारीफ भी करते हैं कि आप बहुत सही गाड़ी चला रहे हो। सुनकर अच्छा लगता कि इसके दीवाने आज भी हैं। शायद उनको एक बार चलाने का भी मन हो। मैंने वैसे किसी को मना नहीं करा कभी।
मैंने अपनी Rx100 की तारीफ में 2 पंक्ति चुराके कुछ लिखा भी है -
"आगे नदिया पडी अपार, Ayush की बाइक कैसे उतरे पार,
Ayush ने सोचा इस पार, तब तक बाइक थी उस पार।"
जादा नहीं हसिये। ये बचपन में लिखा था। समझ लीजिए कितनी दीवानगी रही होगी।
जब से लोग इसकी तारीफ करने लगे हैं, तबसे मेरा लगाव थोड़ा बड़ भी गया है। कहने को लगाव बुरी चीज है, पर कुछ चीजों से इंसान का गहरा लगाव होता है। भले ही उस चीज में जान न हो, मगर इंसान उसमे भी जान फ़ूक ही देता है। आज भी इसकी स्फूर्ति, आवाज, विश्वास मुझे किसी और का होने नहीं दे रही। मेरी समझ से गाड़ी को खुद चलना चाहिए, पर आजकल की गाड़ी को हमें खुद चलाना पड़ता है।
मगर मुझे डर है, जिस हिसाब से प्रदुषण के नियम कड़क होते जा रहे, कहीं इस बाइक को बैन ना कर दें। ये बहुत दुःखद होगा। मेरे अकेले के लिए नहीं ब्लकि पूरी Rx100 कौम के लिए। ना जाने ये दुःख कैसे झेला जाएगा। वैसे भी बैटरी वाले खिलोनों की संख्या काफी बड़ती जा रही है।
सुना है यामाहा फिर से नए अवतार में Rx100 लॉन्च कर रहा है, मगर मैं तो बस ये कहूँगा कि भेड़िया शेर की खाल पहनने से शेर नहीं हो जाएगा। शायद वो इतिहास दोबारा नहीं लिखा जा सकता। इसलिए जितना वक्त़ मिलता मैं इसे चला लेता हूँ। जिस दिन इसकी आख़िरी आवाज सुनने मिलेगी उस दिन मैं हृदय का एक बड़ा अंश खो बैठूँगा जिसमें बचपन से लेकर जवानी तक सफर इस बाइक पर तय किया है।
आपको भी अगर कभी मौका मिले तो 2 स्ट्रोक चला के देखना। देखना एक शेर पर बैठकर कैसा लगता है। ऐसा शेर जो आपके कहने से दहाड़ेगा भी और आपके इशारे से भागेगा भी।
धन्यवाद,
Ayush P Gupta
05 July 2026