मैंने थोड़ा ज्यादा सोच लिया था

हाँ मैंने थोड़ा ज्यादा सोच लिया था,
थोड़े ज्यादा सपने देख लिए थे,
तुम्हारे साथ जिंदगी बिताने का सोचा,
तुम्हारे साथ छत पर बैठना सोच लिया।
साथ बाजार घूमने का थोड़ा सोचा,
साथ टिक्की चाट खाने का सोचा।
थोड़ा दूर घूमने का भी सोचा,
थोड़े रास्ते नापने का भी सोचा।
कुछ बारिश में साथ भीगना सोचा,
कुछ ठंड में हाथ पकड़ कर चलना सोचा।
तुम्हारे साथ सिनेमा देखने का मन था,
सिनेमा के साथ तुम्हारा चेहरा भी देखना था।
साथ में ही खाना भी बनाना था,
साथ ही हर निवाला भी चखना था।
थोड़ा तुमसे ख़फा भी होना था,
थोड़ा मनाने का भी प्रयास करना था।
साथ ही वो सुबह की चाय पीनी थी,
साथ ही थोड़ा आराम भी करना था।
कुछ और ख्वाब साथ देखने थे,
कुछ और मुकाम हासिल करने थे।
थोड़े ही समय में मैंने ज्यादा सोच लिया था,
थोड़ा जल्दी ही तुम्हें अपना मान लिया था।
धन्यावाद,
Ayush P Gupta
31 July 2026