नींद आ रही है

मैंने सोचा आज थोड़ा सो लेता हूँ। पर शायद मैं सो नहीं पा रहा। ऐसा नहीं है कि गर्मी ज्यादा है। मौसम ठंडा है। शरीर भी थका हुआ है, पर शायद मन बेचैन है। क्यों पता नहीं चल पा रहा। तभी मैंने सोचा आखिर नींद है क्या। क्यूँ हम सोते हैं? क्यूँ कुछ समय हम ज्यादा सोते हैं और कुछ समय कम। विज्ञान की द्रष्टि से शायद आपको उत्तर पता भी हो। पर लेखक कि द्रष्टि में नींद शायद कुछ और ही है।
मुझे थोड़ा आश्चर्य है, कि नींद पर ज्यादा कुछ नहीं लिखा गया। हाँ सबने सपनों की दुनिया के बारे में बहुत लिखा। पर उस दुनिया में पहुंचने के लिए नींद जरूरी है। अगर इंसान सोयेगा नहीं तो सपने कैसे देखेगा। ध्यान दीजिये हम दिन वाले शेख चिल्ली के सपनों की बात नहीं कर रहे हैं। इंसान सोयेगा नहीं तो शायद ज्यादा दिन वह अपने दुःखों का भार नहीं उठा पाएगा। सोने से वो उस काल्पनीक दुनिया में चला जाता है, जहाँ पे ईश्वर की जगह वो खुद निर्माता है।
इंसान अपनी एक चौथाई जिंदगी सोने में बिता देता है। आश्चर्य है, इतनी छोटी जिंदगी और उसे भी सोने में निकाल देता? पर शायद बाकी बचीं जिंदगी जीने के लिए इतनी कुर्बानी देना जरूरी है। जो लोग ये कुर्बानी नहीं देते उनसे एक दिन उनका शरीर उसकी कीमत वसूल ही लेता है।
नींद भी जिंदगी के साथ साथ बदलती चली जाती है। बचपन में हम नींद को नहीं बल्कि नींद हमें पकड़ ले जाती थी। एक कहानी सुनी और सो गए। माँ की गोद मिली, सो गये। भोजन किया, फिर सो गए। और सोने के लिए बिस्तर भी नहीं चाहिए था। सोफा, चेयर, कार्पेट जहाँ नींद आयी सो गए। उस वक़्त शोर से भी नींद नहीं खुलती थी। पंखा चले या ना चले फर्क़ नहीं। और नींद भी कच्ची नहीं थी। सोये तो 2-3 घंटों से पहले नहीं उठेंगे। ना किसी चीज़ की फिक्र थी, ना ही कोई जिम्मेदारी। मन शान्त था।
जैसे जैसे बच्चा बड़ा होता उसपे बोझ डालना शुरू कर दिया जाता। घर से ज्यादा स्कूल बोझ डालता है। होमवर्क, ट्यूशन न जाने क्या क्या हैं जिससे घर भी स्कूल सा लगता। अब शायद दिन में सोने में दिक्कत आती। रात में भी जल्दी नहीं सो सकते, क्यूंकि होमवर्क बचा है। फिर भी उसके लिय नींद सबसे बढ़कर है। उसे अभी उतनी चिंता नहीं।
अभी तक बस टेस्ट नींद उड़ाते थे, पर अब दसवीं के बोर्ड आ रहे। बस शायद यहीं से नींद का हमसे मोह कम होने लगता है। छात्र चाहकर भी सो नहीं सकता। अब तो घर वाले भी नींद के दुश्मन बन जाते हैं। हम देश वासियों को भ्रम है, कि जितना छात्र कम देर सोता उतना ही उसने ज्यादा पढ़ाई की है। कुछ लोग रात में पढ़कर खुद को महान ज्ञानी समझते हैं। नींद का पढ़ाई से तालमेल अभी तक काफी लोग समझ नहीं पाये हैं। पढ़ने वाला चार घंटे में भी सब पढ़ सकता है।
इसके बाद तो नींद से दुश्मनी ही समझो। अब वो दिन में सोना कम होगया। और नींद भी संतोष जनक नहीं रही। शायद मजबूरी में सो रहे। अलार्म क्लॉक ने नींद का समय बाँध दिया है। कॉलेज में कुछ लड़के रात में जागने से गर्व महसूस करते थे। और अगले दिन बारह बजे उठते। मुझे भी ऐसे महापुरुषों पर गर्व था।
इंसान ने नींद के भी कई प्रकार बना दिए हैं। अमीरों की नींद, सुकून या चैन की नींद, इंतजार की नींद, ट्रेन के सफर की नींद, घोड़े बेच के सोने वाली नींद। ट्रेन वाली नींद सबसे कच्ची नींद होती है। हर स्टेशन पे लगता अपना स्टेशन आ गया। और आने जाने वाले लोग शायद किसी को सोता देख चिढ़ते हैं। उन्हें दिखाई ही नहीं देता लोग सो रहे। इंतजार की नींद में हमारा शरीर तो सोता पर मन और दिमाग जगे रहते। कुछ लोग बिना घोड़े बेचे भी सो जाते हैं, मानो उनके लिए नींद सबसे उच्चतम है।
बचपन में तो एक ही प्रकार की नींद थी। तभी शायद नींद नींद भी थी। कभी सोचता हूँ यदि नींद ना होती तो इंसान क्या करता? कुछ लोग नींद को व्यर्थ मानते है। कि यदि वे सो गए तो उनका दिन बेकार होगया। उनका कहना है, हमें हर समय उत्पादक रहना है। एक भी क्षण बेवजह गवाना व्यर्थ है। उनका लक्ष्य काफी बड़ा है, पर लक्ष्य तो शायद योजना से हासिल होता है। कई बार व्यस्त रहने को ही हम अपना लक्ष्य मान लेते हैं।
चैन की नींद इसमे काफी महत्वपूर्ण है। कहा जाता है, आप कितने ही कामयाब क्यूँ ना हो जाओ, यदि आप चैन की नींद नहीं सो पा रहे तो सब बेकार है। आखिर आदमी मेहनत किस लिए करता है। छल, कपट करके कोई चैन से सो नहीं पाता। पर कुछ लोगों ने इसपे भी विजय प्राप्त कर ली है। कभी कभी अत्याधिक कर्ज, भविष्य की चिंता, आज की परेशानी, और सबसे महत्त्वपूर्ण सोशल मीडिया भी इंसान की नींद उड़ा देते हैं। अगर आप अच्छे से सो पाते हो, तो इस कलियुग में आप भाग्यशाली हो।
समय काफी तेजी से बदल रहा है। नींद के कई दुश्मन पैदा होते जा रहे। आज आप कितना ही महँगा बिस्तर ले लें, यदि आपका मन शांत नहीं तो वो भी काँटे सामान लगेगा। अगर अमीरी होने से नींद अच्छी आ रही होती, तो गांव वाले जल्दी नहीं सोया करते। नींद का राज उन्हें ज्यादा अच्छे से पता है, जिन्हें अमीर अपने आगे कुछ नहीं समझते। जल्दी उठना, दिन में मेहनत करना, ताजा खाना खाना, और फिर जल्दी सो जाना। यही अच्छी नींद की कुंजी है। अमीर यही कुंजी के लिए इधर उधर भटकते रहते हैं।
काफी वर्षों से मैं भी चैन की नींद नहीं सोया। पहले जिस पंखे का चलने का एहसास तक नहीं होता था, आज उसकी आवाज नींद में रोड़ा बनती है। अब तो AC भी लग गए हैं, पर नींद हमसे रूठ गयी है। कुछ युवक तो नींद की गोली खाकर सोते हैं। ना जाने क्या बात उन्हें खाए जा रही। अच्छी नींद भी मन की शांति जैसी है, जिसे पाना दुर्लभ है। मन, मोह से मुक्त होगा तो शांति आयेगी और उसके साथ अच्छी नींद।
मेरे मन में भी शायद मोह है। जब तक ये मोह जीवित है, तब तक इसके साथ अनेक चिंताए लगी रहेंगी। कुछ चिंताए हम खुद बना लेते हैं। अधिक सोचना भी इंसान के लिए घातक है। पर क्या करें, हम हैं तो इंसान ही। उम्मीद है ये मोह कम होगा और एक दिन पूरा खत्म भी हो जाएगा, और उस दिन हम खूब सोयेंगे। ना पंखे की आवाज सुनाई देगी, ना जगाने वाला कोई होगा।
धन्यावाद,
Ayush P Gupta
10 July 2026